परिणामवाद के अनुसार लीवर खींचना कुल हानि घटाकर अधिक जीवन बचाता है—एक के बदले पाँच।
हर जीवन समान नैतिक मूल्य रखता है, इसलिए वह क्रिया उचित है जो कुल हानि को न्यूनतम करे। ‘कुछ न करना’ भी एक चुनाव है, और उसका पूर्वानुमेय परिणाम पाँच लोगों की मृत्यु है—इसे नकारात्मक जिम्मेदारी से अलग नहीं किया जा सकता। 5 बनाम 1 की तुलना में अपेक्षित हानि स्पष्ट रूप से कम होती है; तटस्थ रहने का भ्रम यहाँ नैतिक आलस्य बन जाता है। आपात स्थिति में सरल सिद्धांत ‘कम हानि करो’ निर्णय को तेज और नैतिक रूप से एकरूप बनाता है।
निष्क्रियता तटस्थ नहीं; लीवर खींचना नैतिक साहस और सक्रिय करुणा का अभ्यास है।
कभी‑कभी सही काम वह होता है जिसे करना भावनात्मक रूप से कठिन लगे, फिर भी वह कम पीड़ा का मार्ग हो। लीवर खींचना अपने नैतिक एजेंसी की जिम्मेदारी स्वीकारना है, जबकि निष्क्रियता पीड़ा को होने देने का अप्रत्यक्ष चयन बन जाती है। दुविधा का ‘मोरल रेजिड्यू’ बना रह सकता है, पर नैतिक साहस वही है जो कम से कम नुकसान की ओर सक्रियता से बढ़े। यही सक्रिय करुणा हमें दमकलकर्मी या ट्रायेज के डॉक्टर जैसे आदर्शों के करीब ले जाती है।
‘अज्ञान के परदे’ के पीछे से देखें तो हम वही नियम चुनेंगे जो सबकी जोखिम-सम्भावना घटाए—यानी लीवर खींचना।
यदि हमें यह न मालूम हो कि हम किस ट्रैक पर खड़े होंगे, तो न्यायोचित नियम वही होगा जो किसी भी व्यक्ति के मरने की संभावना को न्यूनतम करे। यह दृष्टि समान सम्मान और निष्पक्षता का व्यावहारिक अनुवाद है—भूमिकाएँ बदलने पर भी नियम न्यायसंगत बना रहे। इस परिप्रेक्ष्य में ‘कुछ न करना’ एक समूह पर असंगत और अधिक जोखिम लाद देता है, जबकि लीवर खींचना जोखिम का सम्यक् वितरण करते हुए कुल क्षति घटाता है। ऐसा नियम सामाजिक सहमति के लिए भी अधिक औचित्यपूर्ण है।
सुसंगत नियम-नैतिकता कहती है: ‘कम हानि हेतु हस्तक्षेप’ का नियम भरोसा, पूर्वानुमेयता और सामूहिक कल्याण बढ़ाता है।
जब समाज पहले से यह मानक तय करता है कि आपात में कम हानि वाली क्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी, तब निर्णय पारदर्शी और जवाबदेह बनते हैं। यही मानक ड्राइवर-लेस प्रणालियों, आपदा प्रबंधन और अस्पताल ट्रायेज जैसी नीतियों में विश्वसनीयता पैदा करता है। शुद्ध अंकगणित भी इसे सहारा देता है: 5‑विरुद्ध‑1 जैसी दुविधा 100 बार दोहरने पर ‘लीवर खींचो’ नियम औसतन 400 अतिरिक्त जीवन बचाएगा (हर बार शुद्ध 4 अधिक)। नियम-स्तर पर यह सुसंगति व्यक्तिगत दुविधाओं को भी नैतिक दिशा देती है।